Tuesday, February 14, 2023

One day worker camp concluded in Bijnor


बिजनौर में एक दिवसीय कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर संपन्न हुआ


तारीख12 फरवरी, 2023 दिन रविवार,  जनपद बिजनौर के ग्राम नादकार निकट नजीबाबाद स्थित धम्म ज्योति बुद्ध विहार के सभागार में बिजनौर, सहारनपुर मंडल एवं सहारनपुर मंडल में सामिल  सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली जिला शाखाओं का एक दिवसीय कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर  सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। 

  आदरणीय दयाराम बौद्ध  जिल्हा अध्यक्ष बिजनौर की अध्यक्षता मे कार्यक्रम संपन्न हुआ| कार्यक्रम का संचालन प्रदेश महासचिव आदरणीय राकेश मोहन भारती ने किया। 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश अध्यक्ष आदरणीय  राजवीर सिंह बौद्ध, बिजनौर प्रभारी प्रदेश उपाध्यक्ष आदरणीय ऋषा बौद्ध, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य आदरणीय के. एस. नागराज बौद्ध, आदरणीय मामराज सिंह बौद्ध, आदरणीय ओमवती (पूर्व मंत्री यूपी सरकार) एवं उनके पति आदरणीय आर. के .सिंह (पूर्व आई.ए.एस.) आदि गणमान्य अतिथियों को मंचासीन किया गया। 

मुख्य अतिथि आदरणीय राजवीर सिंह बौद्ध ने प्रशिक्षण शिविर का उदघाटन  किया। 

पूज्य भंते करुणाकर ने सभी को त्रिसरण पंचशील दिया| बिजनौर के कार्यकर्ताओं द्वारा मंचासीन समस्त अतिथियों का स्वागत करने के बाद शिविर की कार्यवाही शुरू हुई।

केंद्रीय शिक्षक एवं प्रदेश महासचिव आदरणीय राकेश मोहन भारती ने दि बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया की स्थापना, उद्देश्य एवं लक्ष्य और कार्य, 24 प्रकार के प्रशिक्षण शिविर आदि बिंदुओं पर बारीकी से प्रकाश डाला।

 केंद्रीय शिक्षक एवं मंडल अध्यक्ष सहारनपुर आदरणीय समय सिंह बौद्धजीने संस्था के पदाधिकारी, कर्तव्य और उसकी जिम्मेदारियां इस विषय को विस्तृत रूप से पढ़ाया।

केंद्रीय शिक्षक एवं प्रदेश अध्यक्ष आदरणीय राजवीर सिंह बौद्ध ने संस्था की सदस्यता और उसका वर्गीकरण, रचना, उसकी निर्मिती, कार्यकाल, अनुशासन, कार्यकर्ता की आचार संहिता, कार्यालयीन कामकाज, संस्था की स्टेशनरी एवं संस्था के समक्ष चुनौतियां एवं उनके उपाय* आदि विषयों पर सरल एवं प्रभावशाली भाषा में विस्तार से प्रकाश डाला।

  लगभग दस कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों द्वारा अपना मनोगत अर्थात शिविर के बारे में व्यक्तिगत विचार प्रस्तुत करते हुए शिविर की भूरि भूरि प्रशंसा की तथा हर शाखा में कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर लगवाने का सुझाव दिया। 

    वरिष्ठों के मार्गदर्शन में मंचासीन प्रदेश उपाध्यक्ष (महिला) आदरणीय रिशा बौद्ध, प्रदेश सदस्य , आदरणीय के. एस. नागराज, प्रदेश सदस्य एवं केंद्रीय शिक्षक आदरणीय मामराज सिंह बौद्ध, पूर्व आई.ए.एस आदरणीय आर .के. सिंह एवं पूर्व मंत्री आदरणीया ओमवती जी ने शिविर को बहुत ही लाभकारी बताया तथा प्रचार प्रसार द्वारा ‌ बुद्ध धम्म को घर-घर तक पहुंचाने का आवाहन किया।

*पदाधिकारियों की नियुक्ति*

  इस अवसर पर सहारनपुर के मंडल अध्यक्ष आदरणीय समय सिंह बौद्ध द्वारा संजीव कुमार बौद्धाचार्य को जिला अध्यक्ष सहारनपुर, श्रद्धेय सुरेश गौतम को जिला महासचिव सहारनपुर एवं पूर्व प्रवक्ता श्रद्धेय राजकुमार सिंह बौद्ध को कार्यालयीन सचिव सहारनपुर मंडल नियुक्त किया|  

शाखा बिजनौर की कार्यकारिणी को चुस्त-दुरुस्त करने एवं धम्म के प्रचार प्रसार में तेजी लाने के लिए प्रदेश महासचिव आदरणीय राकेश मोहन भारती, प्रदेश उपाध्यक्ष/ जिला प्रभारी आदरणीय श्रषा बौद्ध, आदरणीय मामराज सिंह बौद्ध ने  श्रद्धेय सुखराम सिंह को कार्यवाहक जिलाध्यक्ष बिजनौर नियुक्त किया| 

 प्रदेश अध्यक्ष आदरणीय राजवीर सिंह बौद्ध ने उक्त पदाधिकारियों को नियुक्त कर नियुक्ति पत्र सौंपे एवं माला पहनाकर उनका स्वागत किया। 

प्रदेश अध्यक्ष द्वारा प्रशिक्षण शिविर का सफलतापूर्वक आयोजन करवाने भोजन सहित समस्त व्यवस्था करावानै के लिए  प्रदेश महासचिव आदरणीय राकेश मोहन भारती, प्रदेश उपाध्यक्ष (महिला) आदरणीय श्रषा बौद्ध एवं जिला कार्यकारिणी बिजनौर का आभार व्यक्त किया।  सरणतय के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।










One day workers training camp concluded in Bijnor


On Sunday, February 12, 2023, a one-day worker training camp of Saharanpur, Muzaffarnagar, Shamli district branches included in Bijnor, Saharanpur division and Saharanpur division was successfully completed in the auditorium of Dhamma Jyoti Buddha Vihar located near Najibabad, Nadkar village of Bijnor district. 


  The program was completed under the chairmanship of respected Dayaram Buddhist District President, Bijnor. The program was conducted by the state general secretary respected Rakesh Mohan Bharti. 


State President respected Rajveer Singh Buddhist, Bijnor in-charge State Vice President respected Risha Buddhist, State Executive Member respected K.K. S. Nagraj Boudh, Respected Mamraj Singh Boudh, Respected Omvati (Former Minister UP Government) and her husband Respected R. K.Singh (ex-IAS) etc. dignitaries were placed on the stage. 


Chief guest respected Rajveer Singh Boudh inaugurated the training camp. 


Pujya Bhante Karunakar gave Trisaran Panchsheel to everyone. The proceedings of the camp started after the workers of Bijnor welcomed all the guests on the stage.


Central Teacher and State General Secretary respected Rakesh Mohan Bharti threw light on the establishment, aims and objectives and work of The Buddhist Society of India, 24 types of training camps etc.


 Central Teacher and Circle President Saharanpur respected Samay Singh Boudhji, the office bearers, duties and responsibilities of the institution, taught this topic in detail.


Central Teacher and State President respected Rajveer Singh Boudh gave simple lectures on the membership of the organization and its classification, composition, its creation, tenure, discipline, code of conduct of the worker, office work, stationery of the organization and the challenges before the organization and their solutions* etc. And explained in detail in effective language.


  About ten workers and office-bearers, while presenting their personal thoughts about the camp, praised the camp and suggested to set up worker training camps in every branch. 


    Manchasin State Vice President (Women) Respected Risha Buddhist, State Member, Respected K.K. S. Nagraj, state member and central teacher respected Mamraj Singh Boudh, former IAS respected R.K. Singh and former minister respected Omvati ji described the camp as very beneficial and appealed to spread Buddhism to every household.


*appointment of officers*


  On this occasion Sanjeev Kumar Bouddhacharya was appointed District President Saharanpur, Revered Suresh Gautam as District General Secretary Saharanpur and former Spokesperson Revered Rajkumar Singh Boudh as Official Secretary Saharanpur Mandal by Saharanpur Divisional President Respected Samay Singh Boudh.  


State General Secretary Respected Rakesh Mohan Bharti, State Vice President/District Incharge Respected Shrasha Buddhist, Respected Mamraj Singh Buddhist appointed Reverend Sukhram Singh as Acting District President Bijnor in order to streamline the executive branch of Bijnor branch and speed up the propagation of Dhamma. 


 State President respected Rajveer Singh Boudh appointed the said office bearers and handed them appointment letters and welcomed them by garlanding them. 


State President expressed gratitude to State General Secretary respected Rakesh Mohan Bharti, State Vice President (Women) respected Shrasha Buddhist and District Executive Bijnor for making all the arrangements including food for successfully organizing the training camp. The program ended with Saranatay.


Monday, February 13, 2023

कार्यकर्ता शिबिर संपन्न Worker camp completed


दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया  उत्तर प्रदेश पश्चिम राज्य शाखा के  मुरादाबाद मंडळ में एक दिवसीय कार्यकर्ता शिबिर संपन्न हुआ|

 तारीख 11 फरवरी, 2023  को डॉ. अंबेडकर सामुदायिक भवन, आंबेडकर नगर, दिल्ली रोड, मुरादाबाद  के सभागार में मुरादाबाद मंडल एवं मंडल में सामिल संभल, मुरादाबाद, अमरोहा, रामपुर, बिजनौर जिला शाखओ के पदाधिकारियोंका  एक दिवसीय कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर संपन्न हुआ|

  प्रशिक्षण शिविर में शाखा मुरादाबाद मंडल, जिला शाखा मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर, अमरोहा , संभल एवं बुलंद शहर के भारी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।

  तथागत बुद्ध एवं डॉ आंबेडकर की प्रतिमाओं के समक्ष पुष्पांजली एवं मोमबत्ती जलाकर शिविर का उदघाटन प्रदेश अध्यक्ष आद राजवीर सिंह बौद्ध ने किया।

 कार्यक्रम की अध्यक्षता मंडल उपाध्यक्ष श्रद्धेय राजवीर सिंह बौद्ध ने की तथा संचालन प्रदेश महासचिव आदरणीय राकेश मोहन भारती ने किया। 

पूज्य भंते अक्षदीप, भंते संघबोधी, भंते संघरतन, प्रदेश अध्यक्ष आदरणीय राजवीर सिंह बौद्ध, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य आदरणीय रामसिंह बौद्ध, मंडल अध्यक्ष आदरणीय मामराज सिंह बौद्ध, मंडल उपाध्यक्ष राजवीर सिंह बौद्ध आदि अतिथियों को मंचासीन किया गया। 

भंते अक्षदीप ने तीन शरण पांच सील ग्रहण करवाए। मंचाशीन पूज्य भंते संघ, समस्त अतिथिगणों का स्वागत  सम्मान, सभी कार्यकर्ताओं के परिचय, मंडल शाखा एवं समस्त जिला शाखाओं की समीक्षा के साथ ही शिविर का मंगलारंभ हुआ। 

केंद्रीय शिक्षक तथा प्रदेश महासचिव आदरणीय राकेश मोहन भारती  ने संस्था के उद्देश्य एवं लक्ष्य और दूसरे सत्र में 24 प्रकार के शिविरों के बारे में विस्तृत  मार्गदर्शन किया।

केंद्रीय शिक्षक तथा मुरादाबाद मंडल अध्यक्ष आदरणीय मामराज सिंह बौद्ध ने पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां एवं कर्तव्य इस विषय पर मार्गदर्शन किया।

 केंद्रीय शिक्षक तथा प्रदेश अध्यक्ष आदरणीय राजवीर सिंह बौद्ध ने दो सत्र में संस्था की सदस्यता, शाखा की निर्मिती, संस्था की रचना, कार्यकाल, कामकाज के दिन, कार्यकर्ता कैसा हो?, कार्यालयीन कामकाज एवं संस्था की स्टेशनरी, आदि विषयों पर कार्यकर्ताओं को विस्तार रूप से मार्गदर्शन किया । 

  प्रशिक्षण में उक्त विषयों पर कार्यकर्ताओं को प्रथम वार बारीकी से जानकारी प्राप्त होने के बाद मनोगत में विद्वान् वक्ताओं ने एक दिवसीय कार्यकर्त्ता प्रषिक्षण शिविर की भूरि भूरि प्रशंसा की और  मुरादाबाद मंडल में शामिल समस्त जिलों में ऐसे ही शिविर आयोजित करने की महती आवश्यकता बताई।

प्रशिक्षण शिबिर के बाद समीक्षा बैठक संपन्न हुई| समीक्षा बैठक मे प्रदेश अध्यक्ष ने प्रदेश महासचिव आद राकेश मोहन भारती से विचार विमर्ष कर मंडल उपाध्यक्ष श्रद्धेय राजवीर सिंह बौद्ध  को मंडल अध्यक्ष एवं श्रद्धेय कमल गौतम को रामपुर का जिलाध्यक्ष घोषित किया | साथ ही निवर्तमान मंडल अध्यक्ष आद मामराज सिंह बौद्ध को प्रदेश कार्यकारिणी का सदस्य नामित किया। 

मंडल अध्यक्ष एवं जिला अध्यक्ष रामपुर से शेष कार्यकारिणी पूर्ण कर अति शीघ्र प्रदेश कार्यालय को भेजने के लिए निर्देशित किया गया। 

 शिविर में जिला संभल के भारी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भाग लिया तथा उनके अनुरोध पर प्रदेश अध्यक्ष ने भविष्य में अपनी उपस्थिति में संभल एवं बुलंदशहर में एक दिवसीय कार्यकर्त्ता प्रषिक्षण शिविर आयोजित करवाने और उसी पर अवसर जिला शाखा के पुर्नगठन का आश्वाशन दिया। 

 प्रशिक्षण शिविर के आशा एवं उम्मीद से ज्यादा सफल होने पर प्रदेश अध्यक्ष द्वारा आयोजक प्रदेश महासचिव आदरणीय राकेश मोहन कुमार भारती एवं मंडल उपाध्यक्ष राजवीर सिंह बौद्ध का आभार व्यक्त किया |









The Buddhist Society of India Uttar Pradesh West State Branch concluded a one-day worker's camp in Moradabad Mandal.

On February 11, 2023, a one-day workers' training camp was held for the office bearers of Moradabad circle and samil Sambhal, Moradabad, Amroha, Rampur, Bijnor district branches in the auditorium of Dr. Ambedkar Community Building, Ambedkar Nagar, Delhi Road, Moradabad.

A large number of workers from Branch Moradabad Mandal, District Branch Moradabad, Bijnor, Rampur, Amroha, Sambhal and Buland cities participated in the training camp.

State President respected Rajveer Singh Boudh inaugurated the camp by lighting a wreath and candle in front of the statues of Tathagat Buddha and Dr. Ambedkar.

The program was presided over by Mandal Vice President respected Rajveer Singh Boudh and coordinated by state general secretary respected Rakesh Mohan Bharti.

Respected Bhante Akshdeep, Bhante Sanghbodhi, Bhante Sangharatan, State President respected Rajveer Singh Buddhist, State Executive Member respected Ramsingh Buddhist, Mandal President respected Mamraj Singh Buddhist, Mandal Vice President Rajveer Singh Buddhist etc. guests were staged.

 Pujya Bhante Akashdeep gave Trisaran Panchsheel.The camp was inaugurated with Manchasheen Pujya Bhante Sangh, welcoming of all the guests, introduction of all the workers, review of Mandal branch and all district branches.

Central Teacher and State General Secretary respected Rakesh Mohan Bharti gave detailed guidance about the purpose and goal of the organization and 24 types of camps in the second session.

Respected Mamraj Singh Boudh, Central Teacher and President of Moradabad Circle, guided on the subject of responsibilities and duties of the office bearers.

Central Teacher and State President respected Rajveer Singh Boudh, in two sessions, gave detailed instructions to the workers on the membership of the organization, creation of the branch, composition of the organization, tenure, working days, how are the workers?, office work and stationery of the organization, etc. Guided by

After the workers received detailed information on the above subjects in the training for the first time, learned speakers praised the one-day worker training camp and told about the great need to organize such camps in all the districts included in Moradabad division.

The review meeting concluded after the training camp. In the review meeting, the State President, after discussing with the State General Secretary Ad Rakesh Mohan Bharti, declared Mandal Vice President Reverend Rajveer Singh Boudh as Mandal President and Reverend Kamal Gautam as District President of Rampur. Along with this, the outgoing Mandal President Aad Mamraj Singh Boudh was nominated as a member of the State Executive.

Mandal President and District President Rampur were directed to complete the remaining executive committee and send it to the state office very soon.

A large number of workers from district Sambhal participated in the camp and on their request, the state president assured to organize one-day workers' training camps in Sambhal and Bulandshahr in future in his presence and to reconstitute the district branch on the same occasion.

The state president expressed gratitude to the organizer state general secretary respected Rakesh Mohan Kumar Bharti and divisional vice president Rajveer Singh Boudh for the success of the training camp beyond expectation and expectation.


Friday, February 10, 2023

माता रमाईची 125 वी जयंती.125th birth anniversary of Mata Ramai celebrated at Vanand


The 125th Jayanti of Mata Ramai was celebrated with great enthusiasm.

Mahaupasika Meeratai Ambedkar has built a grand memorial in Vanand, the village of Mata Ramai's birth place. 

This is the only example in the world of a daughter-in-law building a monument to a mother-in-law.

Honorable Dr. Bhimrao Yashwant Ambedkar Saheb, National Working President of The Buddhist Society of India paid floral tributes to the statue of Mata Ramai at the memorial at Vanand on 7th February 2023 on the occasion of the 125th birth anniversary of Mata Ramai. Pujya Bhante Dhammapriya gave Panchsheel along with Trisaran. Later respected Dr. Bhimrao Yashwant Ambedkar hoisted the Panchsheel flag. Soldiers of Samata Sainik Dal gave general salute. After that the program of the meeting was concluded.

On the life of Mata Ramai, National Vice President Honorable Sushmatai Pawar, National Secretary Honorable Vaishalitai Ahire, Honorable Raginitai Pawar, Sunandatai Waghmare, Shinde Tai ,Bharatitai shiral and President of Maharashtra Bhikaji Kamble Saheb told some incidents of Mata Ramai's life in their speech.

The chief guide respected Dr. Bhimrao Yashwant Ambedkar Saheb said in his guiding speech that the memorial of Mata Ramai will be beautified in the future. There are many occasions of Mata Ramai. 14 of them will be installed in the memorial of Mata Ramai in the form of wall sculptures.

Mata Ramai's life span was only 35 years. She got married in the ninth year, that is, she lived with Babasaheb for 26 years. It is not important who lived how long, but how he lived, how he was useful to the society, society considers. So even after 125 years, we cannot forget Babasaheb and also cannot forget Mata Ramai.

Mother Ramai cannot study while studying Babasaheb.

Those doing PhD on Babasaheb will have to read Mata Ramai while studying. They have to understand Mata Ramai only then the PhD study on Babasaheb can be completed.

Mata Ramaich died on 27th May 1935. She was cremated in the burial ground at Worli. His 1935 death certificate was discovered. The place where Mata Ramai was buried has been secured and a memorial of Mata Ramai has been built there. There is a small statue of Mata Ramai. In the future, a statue of Mata Ramai will be constructed at that place in a magnificent form. This is the first time that a memorial of Mata Ramai has been done in this manner in a Mumbai cemetery. In this way an attempt has been made to give justice to Mata Ramai.

Chhatrapati Shahu Maharaj considered Mata Ramai as his sister. Rajaram, the son of Chhatrapati Shahu Maharaj, called Babasaheb uncle. When Dr. Babasaheb Ambedkar was going for foreign education, Chhatrapati Shahu Maharaj asked Babasaheb that you are going abroad for education but what arrangements have you made for our sister i.e. Ramai. Otherwise I take our sister to Kagal. Self-respecting Mata Ramai told him that we are happy with the way Saheb has arranged us. We will stay here. This information is available in the letter.

National Vice President Honorable S.K. Bhandare, National Secretary and Head of Coaching Department Honorable S. S. Wankhade Saheb, National Secretary Hon'ble Rajesh Pawar, President of Maharashtra Hon'ble Bhikaji Kamble, General Secretary of Maharashtra Hon'ble Sushil Waghmare, Treasurer of Maharashtra Hon'ble Vijay Kamble were prominently present for this event.

 The program of the meeting concluded under the chairmanship of Honorable Anant V Sawant, President of Ratnagiri District. 

Honorable Deepak Dhotre, president of village branch of vnand village, was the chief guest. Also, General Secretary of Ratnagiri District Branch Honorable NB Kadam moderated the program.

 In this manner the 125th birth anniversary program of Mata Ramai was concluded with great enthusiasm at Vanand on 7th February 2023.

Touch the link below to listen to the speech delivered by respected Dr. Bhimrao Yashwant Ambedkar in this meeting.

https://youtu.be/pWEOo7ul4JA

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माता रमाईची 125 वी जयंती


माता रमाईची 125 वी जयंती वणंद येथे मोठ्या उत्साहात संपन्न झाली.
माता रमाई चे माहेर असलेले वणंद या गावी महाउपासिका मीराताई आंबेडकर यांनी भव्य स्मारक बांधलेले आहे. हे स्मारक जगातील एकमेव असे उदाहरण आहे की, महाउपासिका मीराताई आंबेडकर या माता रमाईच्या सुनेने आपल्या सासुबाई माता रमाई चे स्मारक बांधले आहे.

दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया या संस्थेचे राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आदरणीय डॉक्टर भीमराव यशवंत आंबेडकर साहेब यांनी  ७ फेब्रुवारी २०२३ रोजी माता रमाईच्या १२५ व्या जयंती निमित्त वनंद येथील  स्मारकातील माता रमाईच्या पुतळ्याला पुष्पहार घालून वंदन केले. पूज्य भंते धम्मप्रिय  यांनी त्रिसरणसह पंचशील दिले . नंतर आदरणीय डॉक्टर भीमराव यशवंत आंबेडकर साहेब यांनी पंचशील ध्वजाचे ध्वजारोहण केले .समता सैनिक दलाच्या जवानांनी जनरल सलामी दिली .नंतर सभेचा कार्यक्रम संपन्न झाला.

माता रमाईच्या जीवनावर राष्ट्रीय उपाध्यक्षा आदरणीय सुषमाताई पवार ,राष्ट्रीय सचिव आदरणीय वैशालीताई अहिरे ,आदरणीय रागिनीताई पवार, सुनंदाताई वाघमारे, शिंदे ताई ,भारतीताई शिराळ तसेच महाराष्ट्राचे अध्यक्ष भिकाजी कांबळे साहेब यांनी माता रमाईच्या जीवनावरील काही प्रसंग आपल्या भाषणातून सांगितले.

प्रमुख मार्गदर्शक आदरणीय डॉक्टर भीमराव यशवंत आंबेडकर साहेब यांनी मार्गदर्शनपर भाषणात सांगितले की येणाऱ्या काळात माता रमाईच्या स्मारकाचे सुशोभीकरण करण्यात येईल. माता रमाई चे अनेक प्रसंग आहेत . त्यातील 14 प्रसंग भिंती शिल्पाच्या स्वरूपात माता रमाईच्या स्मारकामध्ये लावण्यात येतील.

माता रमाई चे आयुष्य केवळ 35 वर्षे होते. त्यांचे लग्न नवव्या वर्षी झाले म्हणजेच त्या २६ वर्षे बाबासाहेबांसोबत जगले. कोण किती जगला याला महत्त्व नसून तर कसा जगला, कसा समाजाला उपयोगी आला हे समाज कन्सिडर करत असतो .म्हणून 125 वर्षे होऊनही आज बाबासाहेबांना जसे विसरू शकत नाही तसेच माता रमाईला सुद्धा विसरू शकत नाहीत.

बाबासाहेबांचा अभ्यास करताना माता रमाईला डावळून अभ्यास होऊ शकत नाही.

बाबासाहेबांवर पीएचडी करणाऱ्यांना अभ्यास करताना माता रमाई वाचावी लागेल. त्यांना माता रमाई समजून घ्यावी लागेल तरच बाबासाहेबांवरील पीएचडी चा अभ्यास पूर्ण होऊ शकतो.

27 मे 1935 रोजी माता रमाईच निधन झालं .वरळी येथील दफनभूमी मध्ये त्यांचा अंत्यसंस्कार करण्यात आला होता. त्यांचे 1935 चे डेथ सर्टिफिकेट शोधून काढले. ज्या ठिकाणी माता रमाईला दफन करण्यात आले होते ती जागा सुरक्षित करून करून त्या ठिकाणी माता रमाईचे स्मारक बांधले आहे .तेथे माता रमाईचा छोटा पुतळा आहे. भविष्यात त्या ठिकाणी माता रमाईचा भव्य स्वरूपात पुतळा बांधण्यात येईल .मुंबईच्या स्मशानभूमीमध्ये अशा पद्धतीने माता रमाईचे स्मारक पहिल्यांदा झाले आहे. अशा प्रकारे माता रमाईला न्याय देण्याचा प्रयत्न केला आहे.

छत्रपती शाहू महाराज माता रमाईला बहिण मानत होते. छत्रपती शाहू महाराजांचे पुत्र राजाराम हे बाबासाहेबांना मामा म्हणत होते. डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर जेव्हा परदेशी शिक्षणासाठी जात होते त्यावेळेला छत्रपती शाहू महाराज यांनी बाबासाहेबांना विचारले तुम्ही परदेशात शिक्षणासाठी चालला आहात परंतु आमच्या बहिणीची म्हणजेच रमाईची तुम्ही काय व्यवस्था केली आहे. नाहीतर मी आमच्या बहिणीला कागलला घेऊन जातो. स्वाभिमानी माता रमाई ने त्यांना सांगितले की साहेबांनी ज्या पद्धतीने आमची व्यवस्था केली आहे त्यात आम्ही खुश आहोत. आम्ही इथेच राहणार. ही माहिती पत्रामध्ये उपलब्ध आहे.

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आदरणीय एस .के .भंडारे साहेब ,राष्ट्रीय सचिव आणि प्रशिक्षक विभागाचे प्रमुख आदरणीय एस. एस. वानखडे साहेब, राष्ट्रीय सचिव आदरणीय राजेश पवार ,महाराष्ट्राचे अध्यक्ष आदरणीय भिकाजी कांबळे, महाराष्ट्राचे सरचिटणीस आदरणीय सुशील वाघमारे, महाराष्ट्राचे कोषाध्यक्ष आदरणीय विजय कांबळे यांची या  कार्यक्रमासाठी प्रमुख उपस्थिती होती.

 रत्नागिरी जिल्ह्याचे अध्यक्ष आदरणीय  अनंत वी सावंत अध्यक्षतेखाली  हा सभेचा कार्यक्रम संपन्न झाला. 

आनंद गावचे ग्राम शाखेचे अध्यक्ष आदरणीय दीपक धोत्रे हे स्वागताध्यक्ष होते. तसेच रत्नागिरी जिल्हा शाखेचे सरचिटणीस आदरणीय एन बी कदम यांनी कार्यक्रमाचे सूत्रसंचालन केले.

 अशा पद्धतीने माता रमाईच्या 125 व्या जयंतीचा कार्यक्रम वनंद येथे ७ फेब्रुवारी २०२३ रोजी मोठ्या उत्साहात संपन्न झाला.

आदरणीय डॉक्टर भीमराव यशवंत आंबेडकर साहेब यांनी या सभेमध्ये केलेले भाषण ऐकण्यासाठी खालील लिंक ला टच करा.

https://youtu.be/pWEOo7ul4JA












Tuesday, February 7, 2023

Grand Mahila Mela on Mata Ramai's 125th Birth Anniversary.

On the occasion of the 125th birth anniversary of Mata Ramai, 'Bhavya Mahila Melawa' was concluded at Malgaon on behalf of the Buddhist Society of India District Branch Sangli. The gathering was concluded under the chairmanship of Honorable Kamaltai Khandekar, Vice President of Women's Department.

Respected S. K. Bhandare (National Vice President and Staff Officer, Samata Sainik Dal) Respected Sushmatai Pawar (National Vice President and Head of Central Women's Department), Adv.S.S. Wankhade (National Secretary and Head of Central Training Department) Hon'ble Bhikaji Kamble (Chairman, Maharashtra State) led the gathering.

 Respected.S. K. Bhandare, while guiding the issue of rights and rights given to women by the Indian Constitution, said that, 'Dr. Babasaheb Ambedkar brought equality for women without any discrimination between men and women.' Also, the supporters of Chaturvarna system who came to power are talking about bringing the constitution of the country based on Manusmriti, so that the rights and rights given by the constitution do not end, we have to fight for the participation of women. 

Venerable Sushmatai Pawar guided the life of Tyaga Murthy Mata Ramai. Giving examples of how Mata Ramai sacrificed and gave energy to Babasaheb, Ramji Baba, children and society by putting her own sorrows aside, she appealed to women to participate in large numbers to speed up the Dhamma movement. 

Adv.S. S.Wankhade gave guidance on the contribution of women in the Dhamma movement. From Migarmata Vishakha to Mahaupasika Meeratai Ambedkar's era till today, he called for the Dhamma Revolution of Dr. Ambedkar. Babasaheb Ambedkar to be more dynamic by increasing the participation of women. 

Venerable Bhikaji Kamble gave guidance on the special features of Buddhist Dhamma. Dhamma tells how man should treat man, saying that there is equality between men and women in Dhamma and asserted that the world has no alternative to Buddhism.

In the gathering everyone read the Preamble of the Indian Constitution by District President Rupesh Tamgaonkar and took oath. 






Sunday, February 5, 2023

दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया व तिचे कार्य

दिनांक 4 फेब्रुवारी 2023 रोजी चैत्यभूमी दादर येथे केंद्रीय शिक्षिका शिबिरात  आयु . राजेश पवार : राष्ट्रीय सचिव ( महाराष्ट्र, पंजाब व हरियाणा राज्याचे प्रभारी) यांनी दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया व तिचे कार्य हा विषय शिकविला .

या विषयाची माहिती पुढील प्रमाणे दिली.

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ब्रहादेशातील रंगुन येथे आंतरराष्ट्रीय बौद्ध धम्म परिषदेत दि.४डिसेंबर१९५५ रोजी सहभागी झाले. तिथे त्यांनी 'बुद्धिस्ट मुव्हमेंट इन इंडिया' अर्थात 'भारतातील बौद्ध चळवळ' या विषयावर सविस्तर भूमिका विषद केली. भारतात परतल्यानंतर त्यांनी 'दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया' या धम्मसंस्थेची स्थापना केली. स्वतः या संस्थेची घटना, अध्यक्षीय लोकशाही पद्धती नुसार लिहिली.  ही संस्था 'सोसायटीज रजिस्ट्रेशन ॲक्ट १८६०' अन्वये नोंदणीकृत केली. दि. ४ मे १९५५ रोजी रजिस्ट्रेशन क्रमांक ३२२७ मिळाला. तसेच ही संस्था डॉ.बाबासाहेब आंबेडकरांनी 'मुंबई पब्लिक ट्रस्ट ॲक्ट १९५० अन्वये धर्मादाय आयुक्तांकडे पंजीकृत केली. तिचा नोंदणी क्रमांक ९८२ (एफ) मुंबई दि. १८ मे १९५५ रोजी प्राप्त केला.

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांनी भारतीय बौद्ध महासभेची स्थापना दि. ४ मे. १९५४ रोजी केली. भारतीय बौद्ध महासभा स्थापन झाली तेव्हा धर्मांतर झाले नव्हते. याचाच अर्थ त्यांचा पुर्णतः बौद्ध धर्म स्वीकारण्याचा निर्धार झाला होता. दि. ५ ऑगस्ट, १९५६ रोजी सोहमलाल शास्त्री यांना डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर म्हणाले होते की, "बौद्ध संस्कृतीचे पूर्नजीवन करणे व सर्व भारत बौद्धमय करणे हे माझे उद्धिष्ट आहे." म्हणजे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांना भारतामध्ये बौद्ध संस्कृती पुन्हा रूजवायची होती. आणि त्यासाठी एखाद्या संघटनेची, संस्थेची गरज होती. म्हणून त्यांनी भारतीय बौद्ध महासभा या संस्थेची स्थापना केली. बाबासाहेब हे भारतीय बौद्ध महासभेचे पहिले अध्यक्ष ठरले. त्यानंतर त्यांनी दि. १४ ऑक्टोंबर, १९५६ रोजी नागवंशीय लोकांचे शहर असलेले, नागसंस्कृतीचे केंद्र असलेले आणि महार लोकाची संख्या संघटीत बहुसंख्या असलेला प्रदेश नागपूर येथे बौद्ध धम्माची दीक्षा घेतली.

 दोन कायद्या अंतर्गत रजिस्टर्ड केलेल्या 'दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया' या धम्मसंस्थेच्या घटनेत डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांनी खालील १० ध्येय आणि उद्दिष्ट्ये नमूद केली आहेत.

१) भारतात बौद्ध धम्माचा प्रसार-प्रचार करणे. 

भारतात बौद्ध धम्माचा प्रचार आणि प्रसार करणे हे दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया ह्या संस्थेचे मुख्य ध्येय आहे. या मुख्य उद्देशापायी या संस्थेची निव ठेवण्यात आली आणि आजवर ह्या संस्थेची भरभराट सुरू आहे. ह्या संस्थेची भरभराट व्हावी हे बाबासाहेबांचे स्वप्न होय आणि त्यांनीच ह्या संस्थेची उद्दिष्ट्ये ठरविली. आज भारतभर ह्या संस्थेचे कार्य अविरत सुरू आहे. आज केंद्रीय शिक्षक किंवा शिक्षिका बनून ह्या संस्थेअंतर्गत विविध शिबिरातून धम्मानुयायी लोक निर्माण होत आहे...

२) बुद्ध वंदनेसाठी विहारे बांधणे .

बौद्ध संस्कृतीचे जतन करायचे असेल तर निश्चितच बौद्ध संस्कार आणि उपासना पद्धती टिकून राहिली पाहिजे. किंबहुना ती फोफावली पाहिजे. बौद्ध उपासना करण्यासाठी एक सामूहिक प्रार्थनास्थळ हवेच होते तेच धम्म दीक्षेनंतर अगदी गावखेड्यापासून तर शहर वस्त्यांपर्यंत छोटी छोटी विहारे तत्कालीन अशिक्षित परंतु श्रद्धावान उपासक उपासिकांनी बांधलीत. ह्यामध्ये एकसूत्रता देखील होती. यासाठी प्रेरणा होती दी बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया या मातृसंस्थेची. कारण हीच संस्था धम्मदीक्षेपासून अखंडपणे धम्मप्रचाराचे कार्य करते आहे हे ही एक महत्वाचे उद्दिष्ट होते.

३) धार्मिक व शास्त्रीय विषयांसाठी शाळा व महाविद्यालये स्थापन करणे.

बौद्ध धम्म हा खरे तर धम्म दीक्षेपर्यंत पूर्णतः लोप पावलेला होता.. अशा अभावग्रस्त काळात धम्माचे बीज पेरणे महत्वाचे कार्य होय. हे बीज लावायचे तर तशी शिकवण द्यावी लागेल. ती शिकवण देणारे आपलेच शाळा, महाविद्यालय हवे. तरच बालमनावर, किशोरवयीन विद्यार्थ्यांवर धम्म आणि तर्कशुद्ध शास्त्र, विज्ञान त्यांच्या मनी उतरविता येईल. म्हणून शाळा आणि महाविद्यालये स्थापन करणे हे देखील द्रष्टेपणाने घेतलेले ध्येय होय. 

४) अनाथाश्रम, दवाखाने आणि सहाय्य केंद्र काढणे .

बौद्ध धम्मीय लोक हे मुळातच वंचित घटकातील होय. १९५६ च्य धम्मदीक्षेनंतर काही जरा बदल झाला. परंतु जवळपास संपूर्ण समाज गरिबी, दारिद्र्यात खितपत पडलेला आहे. तेव्हा त्यांच्याकरिता आरोग्यसेव पुरविणे, अनाथाश्रम काढणे हे अगत्याचेच होय. सहाय्य केंद्रे काढलीत तर गरजू व्यक्तिंपर्यंत मदत पोहचविता येईल आणि आपले हवालदिल बांधवांना धीर देता येईल. यासाठीत खरे तर दवाखाने आणि सहाय्य केंद्रे काढायचे बाबासाहेबांनी हेरले आणि हे संस्थेचे ध्येय ठरविले.

५) बौद्ध धम्माच्या प्रचार-प्रसाराकरीता धम्म प्रचारक निर्माण करणे, बौद्ध शिक्षण शिबीरे चालविणे. 

आज दी बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया ही संस्था धम्म प्रचार-प्रसार करण्यासाठी बौद्ध प्रशिक्षण शिबिरे राबविते. त्यातून केंद्रीय शिक्षक तयार केले जातात. धम्म प्रचारकाचे कार्य उत्कृष्टरित्या व्हावे याकरीता शिबिरातून बौद्ध धम्माचे मूळ तत्वज्ञान आणि महत्वाची प्रारंभिक माहिती जनमानसात पोहचविण्यासाठी धम्म प्रचारकांची नियुक्ती देखील अशा शिबिरांमधून होते. योग्य व्यक्तींची निवड करूनच त्याला केंद्रीय शिक्षक म्हणनू जबाबदारी देण्यात येते. त्यामुळे खेडयापाडयात खरा बौद्ध धम्म पोहचतोय सोबत त्या सर्व शिकवणुकीमध्ये एकवाक्यता असते.

६ ) धर्माचा तुलनात्मक अभ्यास करण्यास प्रोत्साहन देणे .

बौद्ध धर्माची महती तेव्हाच लक्षात येऊ शकते जेव्हा अनेक धर्मासोबत तुलनात्मक अभ्यास करता येईल. कारण बौद्ध धर्म हा इतर धर्मासारखा कर्मकांड, दैववाद, अंधश्रद्धा आणि भ्रम पसरवित नाही तर तो जीवनमार्ग होय. मात्र हे प्रत्यक्ष गळी उतरावयाचे असेल तर बौद्ध धर्मासोबत इतर धर्माचा देखील तुलनात्मक अभ्यास होईल आणि जेव्हा तुलनात्मक अभ्यास होतो. तेव्हा बौद्ध धर्माचे वेगळेपण आणि उपयोगिता जास्त मनी भरते. सर्व धर्मांचा तुलनात्मक अभ्यास होतो तेव्हाच बौद्ध धर्माचे वेगळेपण आणि उपयोगिता जास्त मनी सर्व धर्मांचा तुलनात्मक अभ्यास करण्याकडे जास्त भर द्यावा. हेच त्या मागचे खरे गमक होय. त्यामुळे ह्या संस्थेने धम्माच्या तुलनात्मक अभ्यासाला प्रोत्साहन द्यावे हे एक महत्वाचे ध्येय होय .

 ७) बौद्ध वाङ्मयाचे प्रकाशन हाती घेणे आणि सर्वसाधारण माणसापर्यंत बौद्ध धम्माची खरी शिकवण पोहचविण्यासाठी हस्तपत्रके आणि पुस्तिका वाटणे .

हे उद्दिष्ट्य जर पूर्ण करण्यासाठी आपण धडपडलो तर निश्चितच छोट्या छोट्या हस्तपुस्तिका किंवा हस्तपत्रके गल्लीबोळामध्ये म्हणजेच शेवटच्या तळागाळातल्या विविध जाती-धर्मात अडकलेल्या, पिचलेल्या, दबलेल्या पाड्या-बेड्यावर देखील असलेल्या माणसांपर्यंत ही बुद्धाची कल्याणकारी शिकवण पोहचविता येईल.

आज आपण बघतो की हेच कार्य ख्रिस्ती लोक घरोघरी जाऊन बायबलच्या छोट्या प्रति किंवा काही येशूच्या गोष्टी घरापर्यंत निशूल्क देतात. त्यानेच त्या गोष्टीतून आपसूकपणे ख्रिस्तीधर्म अवगत करतात. हीच बाब आपण लक्षात घेऊन बौद्ध वाङ्मयातील विविध छोट्या-छोट्या पुस्तिका काढाव्यात. त्यानेच बौद्धकालीन तत्वे गोष्टीरूपाने येतील आणि बुद्धिझम जनमाणसात सर्वसाधारण लोकांपर्यंत पोहचविणे सोपे होइल हे ध्यानात ठेवूनच अतिशय महत्वाचे हे ध्येय होय, की बौद्ध वाङ्मयाचे प्रकाशन करणे आणि हस्तपत्रके किंवा छोटेखानी पुस्तिका वाटणे होय.

८) गरज पडल्यास भिक्षूंचा नवा संघ निर्माण करणे 

 बौद्ध धम्माचा प्रसार आणि प्रचार करण्यासाठी दोन संघ खास प्रभावशाली आहेत. एक उपासक उपासिका संघ आणि दुसरा भिक्षु संघ .उपासक, उपासिका ह्या गृहस्थी जीवनाच्या रहाटगाड्यात असल्याने त्या दुर्लक्षित करतात. मात्र त्यामुळेच ही जबाबदारी पूर्णपणे भिक्खू संघावर येऊन पडलेली दिसते. भिक्षु संघ जर ज्ञानी असेल, शीलाचे पालन करणारा असेल तर त्याचा सामान्य उपासकांवर निश्चितच परिणाम होतो. आज प्रशिक्षित भिक्षुची फारच गरज आहे. भिक्षुचा दर्जा वाढविण्याची अतिशय आवश्यकता आहे. भिक्षु म्हटले की, ते धम्मधर, सदाचारी, शीलवान असलेच पाहिजे. त्यांना प्रशिक्षण देवून अधिक समाजाभिमुख बनविणे ही काळाची गरज होय. त्यामुळे गरज पडल्यास भिक्षूंचा नवा संघ निर्माण करण्याची निश्चितच आवश्यकता आहे. ही आवश्यकताच नाही तर ती निकड आहे. समाजाला वठणीवर आणण्यासाठी तेवढ्याच ताकदीचा धम्मबल प्राप्त असणारा भिक्षु हवा असतो. असा भिक्षु निर्माण करावा लागतो. योग्य प्रशिक्षणाने ते शक्य आहे. म्हणूनच प्रसंगी नवा भिक्षु संघ निर्माण करण्याचे देखील एक महत्वाचे ध्येय आहे.

९) बौद्ध धम्माच्या प्रचारार्थ प्रकाशनाचे कार्य पार पाडण्याच्या हेतूने मुद्रणालये चालविणे .

बौद्ध साहित्य हे पालि भाषेत आहे. बौद्ध धम्माला समजून घ्यायचे असेल तर मूळ पालि साहित्याचा अभ्यास करावाच लागेल. हे साहित्य तळागाळातल्या शेवटच्या माणसांपर्यंत जर पोहचवायचे असेल तरच आपल्याला प्रकाशन करावे लागेल. अनुवाद करून घ्यावा लागेल आणि मुलांकरीता तर वेगवेगळी रंगीबेरंगी चित्र असणारी पुस्तके म्हणजे वयोगट बघून त्यांना बौद्ध धम्म टिकविण्याची योग्य ते पाऊल उचलावे लागेल. त्यानेच खरे तर बौद्ध धम्म फोफावेल आणि आपले स्वतः चे प्रकाशन असेल तर आपल्याला ह्या कामाला गती देता येईल. मुद्रणालय, प्रकाशन संस्था ह्या मोठ्या प्रमाणात साहित्य काढण्यासाठी हवेतच. जर का आपल्याकडे ही साधनं नसतील तर आपण बौद्ध धम्माचा प्रचार आणि प्रसार करूच शकत नाही. हा व्यापक दृष्टीकोन आणि पण असल्यामुळे बाबासाहेबांनी साहित्य मोठ्या प्रमाणात बाहेर येईल आणि बौद्ध धम्म तळागाळातील प्रत्येक समाज बांधवांपर्यंत पाहचेल आणि त्यामुळेचधर्मा-धर्माचा विचार स्वीकार आपसूनकच होईल आणि बुद्ध तत्वज्ञान हे सर्वांना ज्ञात होईल. त्यामुळेच ह्या ध्येयाला देखील महत्व देण्यात आले आहे.

 १०) बंधुभाव संवर्धन आणि कार्यातील एकजूट यासाठी भारतीय बौद्धांचे मेळावे आणि धम्म परिषदा भरविणे.

आज आपण बघतोय माणूस माणसापासून दूर होत चाललाय. अशा परिस्थितीत समाजातील सर्व बांधव एकजूटीने राहावेत, एकसंघ समाज जास्त बुलंद किल्ला ठरतो, तो अभेद्य ठरतो सर्वांसाठी त्याकरीता सामाजाची एकजूट व्हावी यासाठी घटनाकार बाबासाहेबांनी बौद्धांचे मेळावे आणि धम्म परिषदा या विषयावर भर देणे हे एक ध्येय आणि उदिष्ट ठरविलेले दिसते. त्यातून समाजात एकजूट राहिले. बंधुभाव वाढेल आणि धम्माची सर्वोतोपरी चर्चा झालेली दिसेल. हे ही उद्दिष्ट समाज बांधणीकरीता उपयुक्त ठरते. धम्म जाणून घेण्यासाठी सर्वांनी एका ठिकाणी एकत्र येणे हे क्रमप्राप्तच आहे. ज्यावेळी सर्व एकत्र येतील तेव्हाच धम्म परिषदांमधून धम्म समजून घेण्यासाठी पूरक वातावरण तयार होईल. त्यानेच समाज जागृती होईल, समाज धम्मपथावर वाटचाल करेल आणि धम्मघर होईल. हे सर्व ध्यानात घेऊनच हे ही उद्दिष्ट घेतल्या गेले. हे ध्येय जर आपण गाठले तरच सुजान समाज निर्माण होवू शकतो. म्हणूनच आपण ह्या उद्दिष्टाला पूर्णत्वाला नेले पाहिजे. समाजात बंधुभाव निर्माण झाला पाहिजे. त्याचे संवर्धन झाले पाहिजे. ही एकजूट आपल्या शक्ती बनणार आहे. ही संस्थापक अध्यक्षांना ज्ञात होते. म्हणून त्यांनी अशा प्रकारचे ध्येय आणि उद्देश ह्या संस्थेच्या घटनेत दिलेले आहेत. 


डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांनी 'जनता' पाक्षिकाचे नामांतर दि. ४ /२/१९५६ रोजी 'प्रबुद्ध भारत' असे केले. भारतातील बौद्धांसाठी 'बुद्ध पूजा पाठ' ही पुस्तिका डॉ.बाबासाहेब आंबेडकरांनी दि. २४ फेब्रुवारी १९५६ रोजी पाली भाषेत लिहून, गाथांचा मराठी अनुवाद सुद्धा त्यात लिहिला. बुद्ध जयंती निमित्ताने डॉ.बाबासाहेब आंबेडकरांनी ब्रिटीश ब्रॉड कास्टींग (बी.बी.सी.) लंडन वर 'मला बौद्ध धम्म का पसंत आहे.' या विषयावर दि. १२ मे १९५६ रोजी तर्कशुद्ध भाषण दिले.

दिल्ली येथील जाहीर समेत डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांनी 'धम्म आणि गीता' या विषयावर दि. १० जून १९५६ रोजी तुलनात्मक विश्लेषण केले. धम्मदीक्षा घेण्यासाठी शुभ्र वस्त्र परिधान करून नागपूरच्या नाग भूमीवर अशोका विजयादशमीला येण्याचे जाहीर आवाहन डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांनी दि.२३ सप्टेंबर १९५६ रोजी प्रेस कॉन्फरन्स घेऊन व जाहीर पत्रक काढून देशभरातील जनतेला केले.

पुज्य भन्ते महास्थवीर चंद्रमणी यांच्याकडून डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर  यांनी अशोक विजयादशमीच्या दिवशी दि. १४ ऑक्टोबर १९५६ रोजी दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया, नागपूर जिल्हा शाखेच्या धम्मपीठावर स्वतः धम्मदीक्षा घेतली, त्यानंतर २२ कागदावर लिहिलेल्या २२ प्रतिज्ञा, डोळ्यावरील  चष्मा काढून डॉ बाबासाहेब आंबेडकरांनी जमलेल्या ५ लाख जनसमुदायाकडून  जाहीरपणे वदवून घेतल्या. मग त्यांना बौद्ध धम्माची दीक्षा दिली. हे जगातील सर्वात मोठे धर्मातरण ठरले. तसेच तथागत भगवान बुद्ध व चक्रवर्ती सम्राट  अशोकांच्या नंतर हे धर्मांतर तिसरे विश्व विख्यात 'धम्म चक्र प्रवर्तन' ठरले. एकाने - दर एकाला धम्मदीक्षा देण्याचा अधिकार डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांनी  सर्व उपस्थितांना दिला.

पुढील धम्मदीक्षेचा भव्य सोहळा मुंबईत घेण्याचे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांनी जाहीर केले. परंतु अल्पावधीतच त्यांचे दिल्ली येथे ६ डिसेंबर १९५६ रोजी महापरिनिर्वाण झाले . त्यांचा अंत्यविधी दादर पश्चिम येथे चौपाटीवर दिनांक 7 डिसेंबर 1956 रोजी करण्यात आला. त्यांच्या अंत्यदर्शनाला जमलेल्या दहा लाख अनुयायांना पूज्य भदंत  डॉक्टर आनंद कौसल्यायन यांनी धम्मदीक्षा दिली.

डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर यांच्या महापरिनिर्वाणा नंतर भारतीय बौद्ध महासभेची जहांगीर हॉल मुंबई येथे दिनांक ३ जानेवारी १९५७ रोजी सर्वसाधारण सभा घेण्यात आली. या सर्वसाधारण सभेत डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर यांचे  एकमेव सुपुत्र यशवंतराव भीमराव आंबेडकर यांची भारतीय बौद्ध महासभेच्या अध्यक्ष पदावर  सर्वानुमते निवड करण्यात आली.

डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर यांचे एकमेव सुपुत्र यशवंतराव यांना सूर्यपुत्र भैय्यासाहेब आंबेडकर या नावाने देखील संबोधले जाते. सूर्यपुत्र भैय्यासाहेब आंबेडकर यांची अध्यक्षपदावर निवड झाल्यानंतर त्यांनी काश्मीर ते कन्याकुमारी पर्यंत देशभर दौरे करून हजारो लोकांना बौद्ध बनवले. थायलंड मधील बँकॉक शहरात संपन्न झालेल्या जागतिक बौद्ध धम्म परिषदेत दिनांक २४ नोव्हेंबर १९५८ रोजी भैय्यासाहेब आंबेडकर सहभागी झाले होते. या धम्म परिषदेत विविध बौद्ध राष्ट्रातून सहभागी झालेल्या प्रतिनिधींना डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर लिखित ,'बुद्धा अंड हीज धम्मा ' हा इंग्रजी ग्रंथ भैय्यासाहेब आंबेडकरांनी  सप्रेम भेट  देऊन बौद्ध धम्माचा जगभर प्रसार करण्याचा एक कुशल प्रयत्न केला.

सूर्यपुत्र भैय्यासाहेब आंबेडकर यांनी डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर यांच्या ७५ व्या जयंती दिनानिमित्त डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर यांचे जन्म ठिकाण महू येथून ते  दादर चौपाटी  पर्यंत भीम ज्योत काढली. या धम्मप्रचारात जमा झालेल्या धम्मदानातून भैय्यासाहेब आंबेडकर यांनी डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर यांच्या अंत्यविधीच्या जागेवर यांचे चैत्यस्मारक  तयार केले. चैत्य स्मारकालाच चैत्यभूमी या नावाने संबोधले जाते.

बौद्ध धर्माचा प्रचार प्रसार करण्यासाठी भैय्यासाहेब आंबेडकरांनी दिनांक 8 ऑक्टोबर 1967 रोजी चक्र प्रवर्तन दिन पूज्य भंते यु वज्रबोधी यांच्याकडून श्रामनेर प्रवचजा घेतली. 'पंडित काश्यप' या प्रवज्जित नावाने भैय्यासाहेब आंबेडकरांनी धम्मज्ञान व संघज्ञान आत्मसात केले.

भारतीय बौद्ध महासभेची एकूण आठ अधिवेशने झाली आहेत.

पहिले अधिवेशन

भारतीय बौद्ध महासभेचे पहिले राष्ट्रीय अधिवेशन दिनांक २८ ऑक्टोबर १९६८ रोजी भैय्यासाहेब आंबेडकरांच्या अध्यक्षतेखाली पुरंदरे स्टेडियम मुंबई येथे संपन्न झाले. भदंत दलाई लामा यांनी या राष्ट्रीय अधिवेशनाचे उद्घाटन केले. या अधिवेशनात 'बौद्ध जीवन संस्कार पाठ' या पुस्तकाला सर्वानुमते मंजुरी देण्यात आली. या अधिवेशनात बौद्धाचार्य वर्ग निर्माण करण्याचा निर्णय घेण्यात आला. 

दिनांक १७ सप्टेंबर १९७७ रोजी भैय्यासाहेब आंबेडकर यांचे निधन झाले. भैय्यासाहेब आंबेडकर यांच्या निधनानंतर दिनांक २ ऑक्टोबर १९७७ रोजी सर्वसाधारण सभा घेण्यात आली. या सर्वसाधारण सभेत तत्कालीन सरचिटणीस आयुष्यमान ज.वि. पवार यांनी राष्ट्रीय अध्यक्ष पदासाठी डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर यांच्या सुनबाई व भैय्यासाहेब आंबेडकर  यांच्या धर्मपत्नी आयुष्यामती मीराताई आंबेडकर यांच्या नावाची जाहीर सूचना मांडली. सर्वांचे अनुमोदन मिळाल्यावर मीराताई आंबेडकर यांनी राष्ट्रीय अध्यक्ष पदाची धुरा आपल्या खांद्यावर घेतली.

दुसरे राष्ट्रीय अधिवेशन 

भारतीय बौद्ध महासभेचे दुसरे राष्ट्रीय अधिवेशन नागपुर येथील अंबाझरी मैदानात दिनांक 26 27 व 28 डिसेंबर 1980 रोजी मीराताई आंबेडकर यांच्या अध्यक्षतेखाली संपन्न झाले. या अधिवेशनात एकूण 24 ठराव सर्वांमध्ये पारित करण्यात आले. तसेच बौद्ध जीवन संस्कार पाठाची नवीन आवृत्ती या अधिवेशनात प्रकाशित करण्यात आली.

दिनांक १४,१५  व १६ मे १९८६  रोजी आंबेडकर भवन दादर येथे तीन दिवसीय 'भिक्खू परिषद' आयोजित करण्यात आली होती. या भिक्खू परिषदेचे उद्घाटन दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया च्या भिक्खू संघाचे संघनायक पूज्य भंते आनंद मित्र महाथेरो (कोलकत्ता) यांनी केले.

संघनायक महाथेरो आनंद मित्र (कोलकत्ता) यांच्या शुभहस्ते दिनांक १६ मे १९८६ रोजी भिक्खू संघाच्या वतीने आदरणीय मीराताई आंबेडकर यांना 'महाउपासिका' उपाधि देऊन गौरविण्यात आले.

तिसरे राष्ट्रीय अधिवेशन 

दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया अर्थात भारतीय बौद्ध महासभेचे तिसरे राष्ट्रीय अधिवेशन महाउपासिका आदरणीय मीराताई आंबेडकर यांच्या अध्यक्षतेखाली दिनांक १८ व १९ मार्च १९८९ रोजी डॉक्टर आंबेडकर भवन राणी झाशी मार्ग दिल्ली येथे घेण्यात आले. या अधिवेशनात 24 मागण्यांचे ठराव पारित करण्यात आले. काही महत्त्वाचे ठराव असे आहेत.

बुद्धगया महाबोधी विहाराचा ताबा बौद्धांकडे देणे.

 बौद्धांसाठी स्वतंत्र कायदा करणे .

संसदेच्या हॉलमध्ये डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकरांचे तैलचित्र लावणे.

 संसद भावना समोर डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकरांचा पूर्णाकृती पुतळा उभारणे .

पोस्टाच्या तिकिटावर व नाण्यावर डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकरांची प्रतिमा छापने.

 सर्व बौद्ध लेण्या, गुंफा, चैत्य यांचे संरक्षण व संवर्धन करणे.

चौथे राष्ट्रीय अधिवेशन.

दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया चे चौथे राष्ट्रीय अधिवेशन चैत्यभूमी दादर येथे दिनांक 27 28 व 25 नोव्हेंबर 1992 रोजी घेण्यात आले पूज्य भदंत दलाई लामा यांनी या अधिवेशनाचे उद्घाटन केले. महाउपासिका आदरणीय मीराताई आंबेडकर यांच्या अध्यक्षतेखाली चौथे राष्ट्रीय अधिवेशन संपन्न झाले.

खंडित झालेल्या धम्मयान  मासिकाचे प्रकाशन करण्यात आले.

प्रत्येक शाखेत चार विभाग कार्यरत राहतील असे ठरविण्यात आले.

संस्कार विभाग ,प्रचार व पर्यटन विभाग ,महिला विभाग व संरक्षण विभाग असे चार विभाग कार्यरत राहतील असे ठरविण्यात आले.

डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर आणि स्थापन केलेले समता सैनिक दल स्वतंत्र न ठेवता भारतीय बौद्ध महासभेचा संरक्षण विभाग म्हणून कार्य करेल असा महत्त्वपूर्ण निर्णय या अधिवेशनात घेण्यात आला.

समता सैनिक दलाच्या 'कमांडर इन चीफ 'या प्रमुख पदावर भारतीय बौद्ध महासभेच्या राष्ट्रीय अध्यक्षा महाउपासिका मीराता आंबेडकर यांची सर्वानुमते निवड करण्यात आली.

पाचवे राष्ट्रीय अधिवेशन

भारतीय बौद्ध महासभेचे पाचवे राष्ट्रीय अधिवेशन उत्तर प्रदेशातील खुर्जा बुलंद शहर येथे दिनांक 12 13 व 14 मार्च 1999 रोजी घेण्यात आले. महाउपासिका आदरणीय मीराताई आंबेडकर यांच्या अध्यक्षतेखाली हे अधिवेशन संपन्न झाले. भारतीय बौद्ध महासभेचे राष्ट्रीय सल्लागार एडवोकेट प्रकाश तथा बाळासाहेब आंबेडकर यांनी या अधिवेशनाचे उद्घाटन केले.
या अधिवेशनात पूर्व पश्चिम उत्तर दक्षिण असे चार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त करण्यात आले
या अधिवेशनात एकूण 24 ठराव पारित करण्यात आले.

भारतीय बौद्ध महासभेचे राष्ट्रीय, राज्य, जिल्हा, तालुका, ग्राम, वॉर्ड इत्यादी स्तरावर कामकाज ज्या घटना व नियमावली नुसार चालते त्या कामकाज व नियम उपविधी या पुस्तकाचे दिनांक २१ मार्च २००० रोजी दादर येथे माउपासिका मीराताई आंबेडकर यांच्या हस्ते सर्वसाधारण सभेत प्रकाशन करण्यात आले.

दिनांक १९ ऑगस्ट २००० रोजी चैत्यभूमी दादर येथे अखिल भारतीय बौद्धाचार्य परिषद  संपन्न झाली. या परिषदेत बौद्धाचार्यांची आचारसंहिता सर्वांनुमते ठरविण्यात आली.

दिनांक २० ऑगस्ट २००० रोजी चैत्यभूमी दादर येथे अखिल भारतीय केंद्रीय शिक्षक शिक्षिका परिषद संपन्न झाली. या परिषदेत केंद्रीय शिक्षक शिक्षिका यांची आचारसंहिता ठरवण्यात आली.

सहावे राष्ट्रीय अधिवेशन.

भारतीय बौद्ध महासभेचे दोन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन दिनांक ३०/३१  ऑक्टोबर २००४ रोजी  सदाकांत ढवण मैदान परळ मुंबई येथे घेण्यात आले. महाउपासिका मीराताई आंबेडकर यांच्या अध्यक्षतेखाली हे अधिवेशन संपन्न झाले. या अधिवेशनाचे उद्घाटन एडवोकेट प्रकाश तथा बाळासाहेब आंबेडकर यांनी केले.

या अधिवेशनात बौद्धांच्या न्याय हक्कासाठी 24 मागण्यांचे ठराव पारित करण्यात आले.

या अधिवेशनात महिलांनी काळ्या मण्यांचे डोरले युक्त मंगळसूत्र न वापरता सफेद मळ्यांचे अशोक चक्रांकित मंगळसूत्र वापरण्याचा ठराव मंजूर करण्यात आला.

सातवे राष्ट्रीय अधिवेशन.

भारतीय बौद्ध महासभेचे सातवे राष्ट्रीय अधिवेशन दिनांक 22 23 व 24 एप्रिल 2011 रोजी सायन मुंबई येथे घेण्यात आले. महाउपासिका मीराताई आंबेडकर यांच्या अध्यक्षतेखाली हे अधिवेशन संपन्न झाले. राष्ट्रीय सल्लागार एडवोकेट प्रकाश तथा बाळासाहेब आंबेडकर यांनी या अधिवेशनाचे उद्घाटन केले.

या अधिवेशनात आठ महत्त्वपूर्ण ठराव मंजूर करण्यात आले.

या अधिवेशनात पूजा साहित्यातुन पाच फळे वगळण्याचा ठराव घेण्यात आला.

या अधिवेशनात मातीचा कुंभ,पाणी व पांढरा धागा वगळण्याचे सर्वानुमते ठरले.

वधू-वरांची कर्तव्य विवाह विधीमध्ये न वदवून  घेण्याचे एकमताने ठरले.

विवाह विधीमध्ये वधू  वराच्या प्रतिज्ञा सकारात्मक पद्धतीने वाढवून घेण्याचे ठरले.

जय मंगल अष्टगाथेची शेवटची गाथा संपल्यावर प्रथम वधू ने वराच्या गळ्यात पुष्पहार टाकणे, नंतर वराने वधूच्या गळ्यात पुष्पहार टाकणे. शेवटी सर्व उपस्थितांनी वधू-वरांवर पुष्पवृष्टी करून टाळ्यांच्या गजरात त्यांचे स्वागत करणे असे सर्वानुमते ठरले. 

आठवे राष्ट्रीय अधिवेशन.

भारतीय बौद्ध महासभेचे आठवी राष्ट्रीय अधिवेशन दिनांक १६ व १७ मी २०१५ रोजी सायन मुंबई येथे घेण्यात आले. राष्ट्रीय अध्यक्ष महोपसिका मीराताई आंबेडकर यांच्या अध्यक्षतेखाली आठवे राष्ट्रीय अधिवेशन संपन्न झाले. एडवोकेट प्रकाश बाळासाहेब आंबेडकर यांनी अधिवेशनाचे उद्घाटन केले. 

या राष्ट्रीय अधिवेशनात पाच महत्वपूर्ण ठराव मंजूर करण्यात आले. 

राष्ट्रीय अधिवेशनात राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आदरणीय भीमराव यशवंत आंबेडकर साहेब  यांचे राष्ट्रीय अधिवेशनातील हे  पहिलेच मार्गदर्शन जनसमुदायाला प्रेरणादायी ठरले.

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ग्राम जालूकी में आयोजित हुआ एक दिवसीय बौद्ध कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर

  डीग/अलवर, 24 मई 2026 दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया अर्थात भारतीय बौद्ध महासभा उत्तरी राजस्थान की जिला शाखा डीग के तत्वावधान में ग्राम जाल...